Wednesday, 19 October 2016

How to end negative thinking in hindi

How to end negative thinking in hindi

समय, सफलता की कुंजी है। समय का चक्र अपनी गति से चल रहा है या यूं कहें कि भाग रहा है। अक्सर इधर-उधर कहीं न कहीं, किसी न किसी से ये सुनने को मिलता है कि क्या करें समय ही नही मिलता। वास्तव में हम निरंतर गतिमान समय के साथ कदम से कदम मिला कर चल ही नही पाते और पिछङ जाते हैं। समय जैसी मूल्यवान संपदा का भंडार होते हुए भी हम हमेशा उसकी कमी का रोना रोते रहते हैं क्योंकि हम इस अमूल्य समय को बिना सोचे समझे खर्च कर देते हैं।

विकास की राह में समय की बरबादी ही सबसे बङा शत्रु है। एक बार हाँथ से निकला हुआ समय कभी वापस नही आता है। हमारा बहुमूल्य वर्तमान क्रमशः भूत बन जाता है जो कभी वापस नही आता। सत्य कहावत है कि बीता हुआ समय और बोले हुए शब्द कभी वापस नही आ सकते। कबीर दास जी ने कहा है कि,

काल करै सो आज कर, आज करै सो अब।
पल में परलै होयेगी, बहुरी करेगा कब।।

सच ही तो है मित्रों, किसी भी काम को कल पर नही टालना चाहिए क्योंकि आज का कल पर और कल का काम परसों पर टालने से काम अधिक हो जायेगा। बासी काम, बासी भोजन की तरह अरुचीकर हो जायेगा। समय जैसे बहुमूल्य धन को सोने-चाँदी की तरह रखा नही जा सकता क्योंकि समय तो गतिमान है। इस पर हमारा अधिकार तभी तक है जब हम इसका सदुपयोग करें अन्यथा ये नष्ट हो जाता है। समय का उपयोग धन के उपयोग से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि हम सभी की सुख-सुविधा इसी पर निर्भर है।

चाणक्य के अनुसार- जो व्यक्ति जीवन में समय का ध्यान नही रखता, उसके हाँथ असफलता और पछतावा ही लगता है।

समय जितना कीमती और वापस न मिलने वाला तत्व है उतना उसका महत्व हम लोग प्रायः नही समझते। परन्तु जो लोग इसके महत्व को समझते हैं वो विश्व पटल के इतिहास पर सदैव विद्यमान रहते हैं।

“ईश्वरचन्द्र विद्यासागर समय के बङे पाबंद थे। जब वे कॉलेज जाते तो रास्ते के दुकानदार अपनी घङियाँ उन्हे देखकर ठीक करते थे।“

“गैलेलियो दवा बेचने का काम करते थे। उसी में से थोङा-थोङा समय निकाल कर विज्ञान के अनेक आविष्कार कर दिये।“

“घर-गृहस्थी के व्यस्त भरे समय में हैरियट वीचर स्टो ने गुलाम प्रथा के विरुद्ध आग उगलने वाली पुस्तक “टॉम काका की कुटिया” लिख दी जिसकी प्रशंसा आज भी बेजोड़ रचना के रूप में की जाती है।“कहने का आशय है कि प्रत्येक विकासशील एवं उन्नतशील लोगों में एक बात समान है- समय का सदुपयोग।

समय का प्रबंधन प्रकृति से स्पष्ट समझा जा सकता है। समय का कालचक्र प्रकृति में नियमित है। दिन-रात, ऋतुओं का समय पर आना-जाना है । यदि कहीं भी अनियमितता होती है तो विनाष की लीला भी प्रकृति सीखा देती है। समय की उपेक्षा करने पर कई बार विजय का पासा पराजय में पलट जाता है। नेपोलियन ने आस्ट्रिया को इसलिए हरा दिया कि वहाँ के सैनिकों ने पाँच मिनट का विलंब कर दिया था, लेकिन वहीं कुछ ही मिनटो में नेपोलियन बंदी बना लिया गया क्योंकि उसका एक सेनापति कुछ विलंब से आया। वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन की पराजय का सबसे बङा कारण समय की अवहेलना ही थी। कहते हैं खोई दौलत फिर भी कमाई जा सकती है। भूली विद्या पुनः पाई जा सकती है किन्तु खोया हुआ समय पुनः वापस नही लाया जा सकता सिर्फ पश्चाताप ही शेष रह जाता है।

समय के गर्भ में लक्ष्मी का अक्षय भंडार भरा हुआ है, किन्तु इसे वही पाते हैं जो इसका सही उपयोग करते हैं। जापान के नागरिक ऐसा ही करते हैं, वे छोटी मशीनों या खिलौनों के पुर्जों से अपने व्यावसायिक कार्य से फुरसत मिलने पर नियमित रूप से एक नया खिलौना या मशीनें बनाते हैं। इस कार्य से उन्हे अतिरिक्त धन की प्राप्ति होती है। उनकी खुशहाली का सबसे बङा कारण समय का सदुपयोग ही है।

समय तो उच्चतम शिखर पर पहुँचने की सीढी है। जीवन का महल समय की, घंटे-मिनटों की ईंट से बनता है। प्रकृति ने किसी को भी अमीर गरीब नही बनाया उसने अपनी बहुमुल्य संपदा यानि की चौबीस घंटे सभी को बराबर बांटे हैं। मनुष्य कितना ही परिश्रमी क्यों न हो परन्तु समय पर कार्य न करने से उसका श्रम व्यर्थ चला जाता है। वक्त पर न काटी गई फसल नष्ट हो जाती है। असमय बोया बीज बेकार चला जाता है। जीवन का प्रत्येक क्षण एक उज्जवल भविष्य की संभावना लेकर आता है। क्या पता जिस क्षण को हम व्यर्थ समझ कर बरबाद कर रहे हैं वही पल हमारे लिए सौभाग्य की सफलता का क्षण हो। आने वाला पल तो आकाश कुसुम की तरह है इसकी खुशबु से स्वयं को सराबोर कर लेना चाहिए।

Importance of time in hindi समय का महत्व

Importance of time in hindi समय का महत्व

समय, सफलता की कुंजी है। समय का चक्र अपनी गति से चल रहा है या यूं कहें कि भाग रहा है। अक्सर इधर-उधर कहीं न कहीं, किसी न किसी से ये सुनने को मिलता है कि क्या करें समय ही नही मिलता। वास्तव में हम निरंतर गतिमान समय के साथ कदम से कदम मिला कर चल ही नही पाते और पिछङ जाते हैं। समय जैसी मूल्यवान संपदा का भंडार होते हुए भी हम हमेशा उसकी कमी का रोना रोते रहते हैं क्योंकि हम इस अमूल्य समय को बिना सोचे समझे खर्च कर देते हैं।
विकास की राह में समय की बरबादी ही सबसे बङा शत्रु है। एक बार हाँथ से निकला हुआ समय कभी वापस नही आता है। हमारा बहुमूल्य वर्तमान क्रमशः भूत बन जाता है जो कभी वापस नही आता। सत्य कहावत है कि बीता हुआ समय और बोले हुए शब्द कभी वापस नही आ सकते। कबीर दास जी ने कहा है कि,
काल करै सो आज कर, आज करै सो अब।
पल में परलै होयेगी, बहुरी करेगा कब।।
सच ही तो है मित्रों, किसी भी काम को कल पर नही टालना चाहिए क्योंकि आज का कल पर और कल का काम परसों पर टालने से काम अधिक हो जायेगा। बासी काम, बासी भोजन की तरह अरुचीकर हो जायेगा। समय जैसे बहुमूल्य धन को सोने-चाँदी की तरह रखा नही जा सकता क्योंकि समय तो गतिमान है। इस पर हमारा अधिकार तभी तक है जब हम इसका सदुपयोग करें अन्यथा ये नष्ट हो जाता है। समय का उपयोग धन के उपयोग से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि हम सभी की सुख-सुविधा इसी पर निर्भर है।
चाणक्य के अनुसार- जो व्यक्ति जीवन में समय का ध्यान नही रखता, उसके हाँथ असफलता और पछतावा ही लगता है।
समय जितना कीमती और वापस न मिलने वाला तत्व है उतना उसका महत्व हम लोग प्रायः नही समझते। परन्तु जो लोग इसके महत्व को समझते हैं वो विश्व पटल के इतिहास पर सदैव विद्यमान रहते हैं।
“ईश्वरचन्द्र विद्यासागर समय के बङे पाबंद थे। जब वे कॉलेज जाते तो रास्ते के दुकानदार अपनी घङियाँ उन्हे देखकर ठीक करते थे।“
“गैलेलियो दवा बेचने का काम करते थे। उसी में से थोङा-थोङा समय निकाल कर विज्ञान के अनेक आविष्कार कर दिये।“
“घर-गृहस्थी के व्यस्त भरे समय में हैरियट वीचर स्टो ने गुलाम प्रथा के विरुद्ध आग उगलने वाली पुस्तक “टॉम काका की कुटिया” लिख दी जिसकी प्रशंसा आज भी बेजोड़ रचना के रूप में की जाती है।“कहने का आशय है कि प्रत्येक विकासशील एवं उन्नतशील लोगों में एक बात समान है- समय का सदुपयोग।
समय का प्रबंधन प्रकृति से स्पष्ट समझा जा सकता है। समय का कालचक्र प्रकृति में नियमित है। दिन-रात, ऋतुओं का समय पर आना-जाना है । यदि कहीं भी अनियमितता होती है तो विनाष की लीला भी प्रकृति सीखा देती है। समय की उपेक्षा करने पर कई बार विजय का पासा पराजय में पलट जाता है। नेपोलियन ने आस्ट्रिया को इसलिए हरा दिया कि वहाँ के सैनिकों ने पाँच मिनट का विलंब कर दिया था, लेकिन वहीं कुछ ही मिनटो में नेपोलियन बंदी बना लिया गया क्योंकि उसका एक सेनापति कुछ विलंब से आया। वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन की पराजय का सबसे बङा कारण समय की अवहेलना ही थी। कहते हैं खोई दौलत फिर भी कमाई जा सकती है। भूली विद्या पुनः पाई जा सकती है किन्तु खोया हुआ समय पुनः वापस नही लाया जा सकता सिर्फ पश्चाताप ही शेष रह जाता है।
समय के गर्भ में लक्ष्मी का अक्षय भंडार भरा हुआ है, किन्तु इसे वही पाते हैं जो इसका सही उपयोग करते हैं। जापान के नागरिक ऐसा ही करते हैं, वे छोटी मशीनों या खिलौनों के पुर्जों से अपने व्यावसायिक कार्य से फुरसत मिलने पर नियमित रूप से एक नया खिलौना या मशीनें बनाते हैं। इस कार्य से उन्हे अतिरिक्त धन की प्राप्ति होती है। उनकी खुशहाली का सबसे बङा कारण समय का सदुपयोग ही है।
समय तो उच्चतम शिखर पर पहुँचने की सीढी है। जीवन का महल समय की, घंटे-मिनटों की ईंट से बनता है। प्रकृति ने किसी को भी अमीर गरीब नही बनाया उसने अपनी बहुमुल्य संपदा यानि की चौबीस घंटे सभी को बराबर बांटे हैं। मनुष्य कितना ही परिश्रमी क्यों न हो परन्तु समय पर कार्य न करने से उसका श्रम व्यर्थ चला जाता है। वक्त पर न काटी गई फसल नष्ट हो जाती है। असमय बोया बीज बेकार चला जाता है। जीवन का प्रत्येक क्षण एक उज्जवल भविष्य की संभावना लेकर आता है। क्या पता जिस क्षण को हम व्यर्थ समझ कर बरबाद कर रहे हैं वही पल हमारे लिए सौभाग्य की सफलता का क्षण हो। आने वाला पल तो आकाश कुसुम की तरह है इसकी खुशबु से स्वयं को सराबोर कर लेना चाहिए।.
Exam 20 tips in hindi

Exam 20 tips in hindi

बोर्ड की परीक्षाओं का परिणाम आते ही जहाँ सामान्यतः चारों तरफ़ विद्यार्थियों में ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है, वहीं न्यूज़ पेपर्स और टीवी चैनल्स पर कुछ दुखद समाचार भी सामने आते हैं, जहाँ विद्यार्थी अच्छे नंबर ना आने और

मानसिक दबाव के कारण आत्महत्या तक कर बैठते हैं | यह एक बहुत ही गंभीर विषय है क्योंकि विद्यार्थी आत्महत्या के मामलों में हम प्रथम स्थान पर हैं |

दोस्तों, कहा जाता है कि “अभ्यास में जितना अधिक पसीना बहाओगे, युद्ध में उतना ही खून कम बहेगा” |

वैसे आज के प्रतियोगिता भरे युग में, पढ़ाई करना और अच्छे नम्बरों से पास होना किसी लड़ाई से कम नहीं रह गया है | बात तो बहुत सीधी सी है कि अगर आपको ये लड़ाई जीतनी है तो इसके लिए पहले से रणनीति बनाने और उसके अनुरूप तैयारी करने की आवश्यकता है |

आमतौर पर सही मार्गदर्शन के अभाव में विद्यार्थी ठीक ढ़ंग से तैयारी नहीं कर पाते और परीक्षा का समय नजदीक आते ही उनमें चिंता और घबराहट बढ़ने लगती है | किसी भी परीक्षा की तैयारी करने और सफल होने के कुछ सूत्र यहाँ दिए गए हैं |

1. काम को टालने की आदत छोड़े

मित्रों, यदि आप वास्तव में सफल होना चाहतें हैं तो आपको कार्यों को टालने की आदत का त्याग करना होगा | जो कार्य ज़रूरी है , उसे सही समय पर करें | आपने सुना होगा कि “काल करे सो आज कर , आज करे सो अब , पल में परलय होएगी ,बहुरि करेगा कब” | जिसका मतलब है कि हमें कल के काम को आज और आज के काम को अभी कर लेना चाहिए |

लेकिन आज के युवाओं ने एक नए दोहे को जन्म दे दिया है | उनका कहना है कि “आज करे सो काल कर , काल करे सो परसों, इतनी जल्दी क्यों करे , अभी पड़े हैं बरसों” | दोस्तों पर सच्चाई क्या है , ये हम सभी जानते है | इसलिए हमें काम को टालना नहीं चाहिए बल्कि सभी जरूरी काम समय पर करने चाहियें |

2. अध्ययन के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करें

पढ़ाई करने के लिए एक उपयुक्त एवं शांत जगह का चुनाव करना बहुत ज़रूरी है | पढ़ाई का स्थान ऐसा होना चाहिए जहाँ पर पूरी एकाग्रता और शांत मन से बैठकर पढ़ा जा सके | यदि घर छोटा हो या घर में ऐसा कोई उपयुक्त स्थान ना हो तो घर के बाहर किसी शांत जगह , किसी दोस्त के घर या किसी पुस्तकालय (Library) में जाकर पढ़ना ज्यादा अच्छा होगा |

3. पढ़ाई के लिए समय सारणी बनाएं

जो भी विद्यार्थी सफल होना चाहता है उसके लिए आवश्यक है कि वह पढ़ाई के लिए निर्धारित किये गए समय की एक समय सारणी (Time Table) बनाएं | उस समय सारणी में हर विषय के लिए एक निश्चित समय आवंटित करें | एक सही समय सारणी बनाने पर ही आप हर विषय पर सही ध्यान दे पायेंगे | दोस्तों , केवल समय सारणी बना लेना ही पर्याप्त नहीं है , उसका पालन करना भी ज़रूरी है |

4. खेल कूद एवं मनोरंजन के लिए समय दें

एक विद्यार्थी के सर्वांगिक विकास (Comprehensive Development ) के लिए ज़रूरी है कि उसे पढ़ाई के साथ साथ खेल कूद और अपने मनोरंजन के लिए भी समय देना चाहिए | खेल कूद से शारीरिक विकास होता है |

घर के अन्दर भी आप बुद्धिवर्धक खेलों ( Memory Improvement Games ) का आनंद ले सकते हैं |

5. बड़े कार्यों को छोटे छोटे भागों में बाँटें

कोई भी बड़ा कार्य जब हम करने लगते हैं तो शुरुआत में बहुत कठिन और असंभव लगता है | लेकिन जब हम उसे छोटे छोटे टुकड़ों में बाँट देते हैं और तो वही काम आसान हो जाता है | इसी प्रकार पढ़ाई में भी बड़े Chapter या Formula को छोटे भागों में बाँट कर आसान बनाया जा सकता है | इससे पढ़ना आसान और रुचिकर हो जाता है |

6. अपने ऊर्जा स्तर को जानें

दिन में अलग अलग समय पर हर व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक उर्ज़ा का स्तर अलग हो सकता है | उदाहरण के तौर पर कुछ लोग सुबह के समय ज्यादा Fresh और Energetic महसूस करते हैं तो कुछ लोग शाम को या फिर रात के समय | कुछ लोगों को सुबह उठ कर पढ़ा हुआ ज्यादा याद रहता है तो कुछ को देर रात को पढ़ा हुआ | तो जिस समय आप अपने को ज्यादा Fresh और उर्ज़ावान महसूस करते हैं, वह समय आप अपनी पढ़ाई के लिए रखें |

7. पढ़ाई के बीच अल्प विश्राम लें

पढ़ाई करते समय आपका दिमाग थक जाता है | जब भी आप थकान महसूस करें तो एक अल्प विश्राम (Short Break) ज़रूर लें | आमतौर पर पढ़ाई करते समय 30 से 40 मिनट के बाद आपको थोड़ा आराम करना चाहिए |

8. मुख्य बिन्दुओं को Highlight करें

जब भी आप पढ़ाई करने बैठें, तो अपने साथ एक Highlighter Pen हमेशा रखें | अगर आपको कोई महत्वपूर्ण नाम, तिथि, स्थान या वाक्य दिखाई देता है तो तुरंत उसे Highlight कर लीजिये | इस तरह से Revision करते समय आपको काफ़ी मदद मिलेगी |

9. अपना लक्ष्य निर्धारित करें

जीवन में अपनी पढ़ाई के लक्ष्य निर्धारित कीजिये | आप कौन सा Chapter या किताब कितने दिनों में ख़त्म करना चाहते हैं, कौन से Subjects पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है अथवा अपने मनपसंद कॉलेज में जाने के लिए कितने प्रतिशत अंकों की ज़रूरत होगी | इस प्रकार अपनी पढ़ाई के लक्ष्यों तो तय करना बहुत ज़रूरी है | अगर आप हर हफ्ते, महीने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए पढ़ाई करेंगे तो साल के अंत में बिना घबराहट के सही ढंग से परीक्षा की तैयारी कर पायेंगे |

10. सभी ज्ञानेन्द्रियों (Senses) को सम्मिलित करें

अपनी पाँचों ज्ञानेन्द्रियों (कान, नाक, आँख, जीभ और त्वचा) का यथासंभव प्रयोग अपनी पढ़ाई में करें | किताब में छपे पिक्चर और चार्ट्स आदि को ध्यान से देखें | यदि संभव हो तो लैब में Practical करें या विषय से सम्बंधित मॉडल को छू कर देखें | आजकल किताबों के साथ CD भी आती है | इन CDs से भी विषय को समझने में काफ़ी मदद मिलती है |

11. बुद्धिवर्धक तकनीकों का प्रयोग करें

यदि आप बुद्धिवर्धक तकनीकों (Memory Improvement Techniques) के बारे में जानते हैं या आपने इन्हें कहीं से सीखा है, तो इनका प्रयोग अपनी पढ़ाई में ज़रूर करिये | ये Techniques बहुत ही वैज्ञानिक और रिजल्ट ओरिएंटेड होती हैं |

12. संतुलित भोजन करें

एक पुरानी कहावत है “जैसा अन्न , वैसा मन”, जिसका अर्थ है कि व्यक्ति जैसा अन्न खाता है वैसा ही उसका मन और शरीर बनता है | यह बहुत ज़रूरी है कि आप संतुलित भोजन लें | कोल्ड ड्रिंक्स और पिज़्ज़ा व बर्गर जैसे जंक फ़ूड से बचें | भोजन का सही तरीका है कि आप सुबह का नाश्ता भारी , दोपहर का भोजन उससे हल्का और रात का भोजन उससे भी हल्का लें | यदि संभव हो तो रात के भोजन में केवल सलाद (Salad) और द्रव्य पदार्थ (Liquids) ही लें |

13. शरीर को स्वस्थ रखें

क्योंकि एक स्वस्थ शरीर में ही एक स्वस्थ मन निवास करता है, इसलिए सुबह के समय सैर पर जायें और अपने सामर्थ्य के अनुसार व्यायाम(Exercise) करें | जितना स्वस्थ आपका शरीर होगा, उतने ही आप एक्टिव और आत्मविश्वास से भरे रहेंगे |

14. प्रश्नों का उत्तर खोजें

यदि आपके मन में कोई प्रश्न है या किसी प्रश्न का उत्तर आपको समझ नहीं आता तो निसंकोच अपने अध्यापक से सहायता मांगें | हो सकता है कि ज्यादा या बार बार प्रश्न पूछने के लिए आपके अध्यापक आपको डांट दें, पर विश्वास कीजिये कि जो विद्यार्थी वास्तव में सीखने की इच्छा रखता है उसे सभी टीचर्स पसंद करते हैं और उसकी मदद के लिए सदा तैयार रहते हैं |

15. सभी संसाधनों का प्रयोग करें

पढ़ाई के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों (Resources) का भरपूर प्रयोग करें | किताबों को ध्यान से पढ़ें, पुस्तकालय (Library) में जायें, अपने अध्यापकों और अभिभावकों से सहायता लें, दोस्तों और बड़े भाई-बहन से मदद मांगें, इन्टरनेट और टेलीविज़न आदि सभी उपलब्ध संसाधनों का सकारात्मक प्रयोग अपनी पढ़ाई के लिए करें |

16. ब्लेंक कार्ड्स (Blank Cards) का प्रयोग करें

पढ़ते समय किसी विशेष बात या किसी उत्तर के मुख्य बिन्दुओं (Main Points) को लिखने के लिए आप छोटे छोटे साइज़ के ब्लेंक कार्ड्स या पर्चियों का प्रयोग कर सकते है | ये कार्ड्स आपको revision करते समय काफ़ी मददगार साबित होंगे | परंतु सावधान, इसका अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए की आप इन्हें परीक्षा के समय नकल (Cheat Notes) के रूप में प्रयोग करें |

17. स्वयं को प्रोत्साहित करें

परीक्षा भवन में जाने से पूर्व स्वयं को प्रोत्साहित (Motivate) करें | जीवन की उन घटनाओं को याद करें, जब आप सफल हुए थे | अपने आप को विश्वास दिलाएं कि आप पहले भी कठिन परिस्थितियों एवं परीक्षाओं में सफल हो चुके हैं | इस परीक्षा में भी आप ज़रूर अच्छे अंकों के साथ सफल होंगे | इस प्रकार के सकारात्मक विचारों से आपका मनोबल बढ़ेगा और आप परीक्षा में अधिक बेहतर प्रदर्शन कर पायेंगे |

18. प्रश्नपत्र को ध्यान पूर्वक पढ़ें

जब भी आप कोई परीक्षा देते हैं तो उत्तर लिखना शुरू करने से पहले, प्रश्नपत्र को कम से कम दो बार ध्यानपूर्वक पढ़ लें | यह सुनिश्चित कर लें कि प्रश्न क्या है और उसका सही उत्तर क्या होगा | कई बार घबराहट में हम प्रश्न समझ ही नहीं पाते और गलत उत्तर लिख देते हैं |

19. अधिक मात्रा में जल लें

विज्ञान इस बात को प्रमाणित कर चुका है कि शरीर में जल का स्तर जितना अधिक रहता है, उतना ही हमारा मस्तिष्क अधिक कुशलता के साथ कार्य करता है | इस लिए अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिये | पढ़ाई करते समय अपने पास पानी की एक बोतल रखनी चाहिए | अगर संभव हो तो परीक्षा केंद्र (Examination Centre) में भी अपने साथ एक पानी की बोतल ले कर जायें और समय-समय पर पानी पीते रहें |

20. शांत हो जायें

परीक्षा में यदि उत्तर याद करने में कठिनाई हो तो घबराने कि आवश्यकता नहीं है | घबराहट से स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है | आँखें बंद करके कुछ पल के लिए चुपचाप बैठ जायें और गहरी सांस लें | इससे आपके मन को शांत करने में सहायता मिलेगी | फिर धीरे-धीरे उत्तर याद करने की कोशिश करें | जो भी मुख्य बिंदु (Main Point) याद आये उसे कागज़ पर लिख लें |

Job interview Tips in hindi

Job interview Tips in hindi

1) CV / Resume को बनाने में पूरी सावधानी बरतें :

आपकी CV का मकसद अपने potential employer को यह दिखाना होना चाहिए की क्यों आप इस जॉब के लिए best person हैं .आपकी CV ही आपसे related वो पहली चीज होती है जो Interviewer के सामने जाती है .कह सकते हैं कि उनकी नज़रों में यही आपका first impression होता है . अगर interviewer को CV अच्छी नहीं लगी , या उसमे बचकानी mistakes दिखीं तो आपके लिए उसका perception खाराब हो सकता है . और ये भी ध्यान रखें कि आपकी छोटी छोटी बातें कहीं ना कहीं आपकी बड़ी -बड़ी हरकतों की ओर भी इशारा करती हैं . अगर कोई व्यक्ति अपनी CV बनाने में असावधान है तो job में भी उसके ऐसा करने के काफी chances हैं , और ये बात interviewer अच्छी तरह से जानता है .

CV अच्छे से बनाना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि ज्यादातर companies में पहले CV के basis पर ही candidates को छांट दिया जाता है , और अगर आप यहीं छांट गए तो बाकी tips रखी की रखी रह जायेंगी . इसलिए इस most important step को कत्तई miss ना करें .

मैं यहाँ CV कैसे बनाएं , ये तो नहीं बता सकता पर कुछ important points ज़रूर share कर सकता हूँ जिस पर आपको ध्यान देना चाहिए :

आपकी CV का look professional होना चाहिए .
बड़े -बड़े paragraph की जगह bullet points use करें , ये interviewer को CV पढने के लिए ज्यादा प्रेरित करते हैं .
कोई भी Spelling mistake नहीं होनी चाहिए .
अगर CV दो page में बन सकती है तो जबरदस्ती उसे चार page का ना बनाएं .
अलग -अलग job के हिसाब से अपनी CV में थोड़े – बहुत बदलाव करें .
उन points को highlight करने की कोशिश करें जो इस job से related हों.
CV बनाने के बाद दो-चार लोगों से उसे पढवा लें .

2) Job से related theoretical knowledge को special attention दें :

मैं पिछले 5-6 साल से Insurance field से related हूँ . इस sector की मुझे ठीक – ठाक knowledge है , पर जब कभी कोई interview schedule होता है तो मैं अपनी पुरानी books, PPTs, और अन्य resource material अच्छी तरह से दोहराता हूँ .

Job से सम्बंधित theoretical knowledge को बराबर importance दें , मैं कुछ ऐसे लोगों को जानता हूँ जिनके पास practically काम कैसे होता है इस बात की अच्छी knowledge है , पर वो technical terms और theory में lack करते हैं , और इस वजह से उन्हें interview में उतनी सफलता नहीं मिल पाती . आप इस तरह की गलती ना करें , और theoretical knowledge को कम ना आंकें .

अगर मैं अपनी बात करूँ तो interview की पूरी preparation का 60% time इसी काम में देता हूँ . यहाँ पर दिया गया effort और चीजों को आसान बना देता है , आपका confidence बढ़ जाता है , और आप जो answers देते हैं उसमे ये साफ़ झलकता भी है . Interviewer भी शुरआती answers की quality से ही जान लेता है कि आप एक well prepared candidate हैं या एक casual candidate.

Interview को कभी casually नहीं लेना चाहिए , यह एक competition है , आपको खुद को दूसरों से बेहतर साबित करना होता है . और आप किसी भी department में कोताही नहीं बरत सकते . इसलिए आप जो भी interview देने जा रहे हैं उस field से related theoretical knowledge पर अतिरिक्त ध्यान दें .

3) खुद को Employer की जगह रख कर देखें :

ये सोचिये कि अगर आप Interviewer होते तो एक ideal candidate के अन्दर क्या खोजते . जो job vacancy है उसकी specific need को समझने की कोशिश कीजिये , और उन needs को पूरा करने के लिए जो qualities चाहिएं उसे interview में showcase कर सकते हैं.दूसरी तरफ आप उन qualities को छुपा भी सकते हैं जो इस जॉब के लिए फिट नहीं बैठतीं.

For example: अगर Marketing जॉब के लिए जा रहे हैं , तो आपकी travelling की hobby को आप highlight कर सकते हैं , पर यदि आप operations की जॉब के लिए जा रहे हैं तो आपको इसे highlight नहीं करना चाहिए . अलग -अलग job requirements के हिसाब से आप अपनी CV में बदलाव कर सकते हैं , और उसे और भी effective बना सकते हैं .

आम तौर पर कोई interviewer आपके confidence, subject knowledge और stability , team में काम करने की क्षमता, इत्यादि check करते है .

कई बार ये भी होता है कि आप किसी काम के लिए overqualified होते हैं , जैसे कि अगर computer operator का काम है और कोई MCA उस जॉब के लिए interview दे रहा है , तो भी Employer उसे select करने में हिचकेगा , क्योंकि उसकी इस job में टिकने के आसार कम होंगे . इसलिए अगर job के हिसाब से आपकी qualification अधिक है तो उसे mention नहीं करना ही ठीक रहता है .

इसी तरह जब आप खुद को employer की जगह रखकर देखते हैं तो आपके दिमाग में कई बातें आएँगी और आप उस हिसाब से खुद को तैयार कर सकते हैं .

4) Frequently Asked Questions( FAQs) की तैयारी ठीक से कर लें :

Job interviews में कुछ questions बहुत ही common होते हैं , जो लगभग हर एक interview में पूछे जाते हैं . ऐसे questions की तैयारी अच्छे से कर लें , और साथ ही साथ उन questions के बारे में भी सोच लें जो आपके जवाब के बदले आपसे पूछे जा सकते हैं .

यहाँ मैं ऐसे questions की एक छोटी सी list दे रहा हूँ :

Tell me about Yourself ? / Walk me through you CV?/ Introduce yourself/ अपने बारे में हमें बताएं ?Do you want to ask any question? / क्या आप कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं . ( Inerview के अंत में ये पूछा जा सकता है .)Tell us about your current job, what is your role?/ अपनी मौजूदा नौकरी के बारे में बताएं , आपका काम क्या है ?Why do you want to join this company? / आप ये company क्यों join करना चाहते हैं ?Why is there a gap in your studies/ job ? आपकी पढाई /job में gap क्यों है ?Why do you want to leave your current job? / आप अपनी मौजूदा नौकरी क्यों छोड़ना चाहते हैं ?What are your weaknesses / strengths ? / आपकी weakness/ strength क्या है ?Why should we select you? /हम आपका चयन क्यों करें ?Why did you chose this specialization? आपने यह specialization क्यों किया ?Why your marks are very low in xyz exam? Xyz exam में आपके marks इतने कम क्यों हैं ?What has been your biggest achievement till date? / अब तक की आपकी सबसे बड़ी achievement क्या रही है ?

इसके अलावा आपकी industry से related कुछ common questions भी पूछे जा सकते हैं , इसलिए ऐसे प्रश्नों की study पहले से ही detail में कर लें .

In questions की तैयारी करने का मतलब ये नहीं है कि इन्हें रटा जाए . ये इसलिए है कि आपकी mental clarity बनी रहे . In questions के answers की एक outline आपके mind में तैयार होनी चाहिए , और interview के समय उसे अपने शब्दों में बोलने के लिए तैयार रहना चाहिए .

For example: अगर कोई अचानक ही आपसे आपकी strength पूछ ले तो आप कोई ना कोई उत्तर ज़रूर दे लेंगे पर हो सकता है बाद में आपको लगे की आप अपनी सबसे बड़ी खूबी बताने से ही चूक गए हैं , लेकिन अगर आप पहले से prepared रहेंगे तो ऐसी गलती नहीं होगी .

5) Mind में पूरा interview process कई बार run कर लें :

जब भी मुझे interview देना होता है तो उससे पहले मैं 4-5 बार पूरा का पूरा interview अपने mind में run कर लेता हूँ . और ये बहुत ही detailed होता है .

इसमें मैं सुबह उठने से लेकर interview खत्म होने तक की छोटी से छोटी बात के बारे में सोचता हूँ .ऐसा करने से mind कई चीजों को लेकर बिलकुल clear हो जाता है . जैसे कि कब उठाना है , क्या revise करना है , क्या पहन कर जाना है , कैसे जाना है , कब तक पहुचना है , क्या -क्या लेकर जाना है , कैसा gesture रखना है , कैसे खुद को introduce करना है , etc.

इसमें सबसे ज़रूरी part होता है खुद को interviewer से interact करते हुए visualize करना . मैं अपने मन में सोचता हूँ कि interviewer कोई question पूछ रहा है , और फिर मैं उसका answer दे रहा हूँ . ऐसा करने से कई बार ऐसे questions दिमाग में आ जाते हैं जिनका answer ठीक से नहीं पता होता ,और तब मैं उन्हें अच्छे से तैयार कर लेता हूँ .

पता नही आपको ये technique कैसी लगे पर मैं जब भी इसे करता हूँ इसका कुछ ना कुछ फायदा ज़रूर होता है .

6) Mock & Mirror Practice

MBA के दौरान campus selection से पहले मैंने कई बार mock interviews दिए थे , और अपने friend Dheeraj के साथ मिलकर बहुत लोगों के mock interviews लिए भी थे , हमने इन interviews को web-cam से record भी किया था , जिसे देखकर लोगों को काफी फायदा हुआ था . अगर आपको Interview देने का अधिक अनुभव नहीं है तो आपको भी Mock Interviews जरूर देने चाहियें . मौक interview conduct करने के लिए आप अपने किसी ऐसे friend या senior से request कर सकते हैं जो आपको एक सही feedback दे सके . इस activity को बहुत seriously कीजिये , ये आपको बहुत कुछ सीखा सकती है . क्योंकि अक्सर हम खुद जो गलतियाँ करते हैं वो हमें दिखाई नहीं देतीं , लेकिन और कोई उन्ही चीजों को आसानी से point कर सकता है .

ये ध्यान दें कि कहीं इस activity से आपका confidence कम ना हो . यहाँ interview लेने वाले को समझदारी दिखानी होगी कि वो आपकी improvement areas भी बताये और आपका confidence भी बढ़ाये . अगर आपको लगता है कि इस activity से आपका confidence lose हो सकता है तो इसे ना करें . इसकी जगह आप खुद शीशे के सामने बैठ कर अपना interview दें , और चाहें तो उसे अपने mobile में record भी कर लें . जब आप अपने answers सुनेंगे तो आपको खुद -बखुद कुछ improvement areas दिख जायेंगी .

7) Non-Verbal Communication पर ध्यान दें :

हम जो communicate करते हैं वो सामने वाले तक दो तरह से पहुँचता है . Verbally और Non-Verbally.

Verbally , यानि जो हम बोलते हैं , या लिखते हैं , और Non-Verbally बाकी चीजें , हम कैसे, किस tone में बोलते हैं , हमारे बैठने का तरीका , eye contact, even हमारा dressing sense. अलग -अलग research के मुताबिक़ हमारे total communication में सिर्फ 20% verbal होता है और 80% Non-verbal.

इसलिए इस 80% पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है . आपको interviewer से interact करते वक़्त कुछ बातों का ध्यान देना होगा :

आपको देखकर लगे की आप इस job में genuinely interested हैं .ऐसा आप अच्छे से dress up होकर , time से venue पर पहुंच कर कर सकते हैं .आपकी आवाज़ dull नहीं होनी चाहिए , enthusiasm और confidence show करना बहुत ज़रूरी है .पहली बार मिलते वक़्त हलकी सी smile ज़रूरी है , और interview के दौरान भी आपको एक friendly gesture रखना चाहिए .Job के लिए आपका जोश आपकी तैयारी से साफ़ झलकेगा , इसलिए अपना homework अच्छे से कर के interview देने जाएं . Specially, company के बारे में आपको अच्छी जानकारी होनी चाहिए , और आपकी field से related current developments भी पता होने चाहिएं .

8 ) Contradictory answers ना दें :

Interviewer आपकी honesty check करने के लिए , या बस यूहीं कुछ ऐसे प्रश्न पूछ सकते हैं जिनका उत्तर एक -दूसरे से related हो .

For example: अगर आप पहले कह चुके हैं कि ये आपकी dream company है , पर जब ये पूछा जाता है कि ये company क्या – क्या service देती है , और आप ठीक से नहीं बता पाते हैं , तो येही message जाता है कि एक तरफ तो ये आपकी dream company है और दूसरी तरफ आप इसके बारे में basic जानकारी भी नहीं रखते हैं तो इसका मतलब आप honest नहीं हैं .

या मान लीजिये आपने CV में अपनी hobby Playing Cricket लिखी है , और interview में Playing Chess बताते हैं तो definitely interviewer को आप पर doubt होगा .

Interview में सच बोलना ही सही रहता है , पर यदि आप excitement या nervousness में कुछ अधिक बोल गए हों तो उस उत्तर पर टिके रहिये , और पूरे interview के दौरान उसे contradict मत करिए .

9) जिस भाषा में comfortable हों उसी में इंटरव्यू दें :

यदि आप English और हिंदी दोनों में बात करने में निपुण हैं तो आप ये point skip कर सकते हैं लेकिन अगर आप अंग्रेजी में comfortable नहीं हैं तो आपके लिए एक important point हो सकता है .

अगर देखें तो आज -कल ज्यादातर job interviews English में होते हैं , लेकिन कई जगह जहां Hindi में भी interview हो सकते हैं वहां भी लोग English में ही interview देने की कोशिश करते हैं . देखिये , गलत अंग्रेजी बोलने से अच्छा है सही हिंदी बोलें.

हाँ , अगर job ही ऐसी है जहाँ बिना English के काम नहीं चलने वाला , जैसे कि International Call center, etc में ,तब आप अंग्रेजी में ही बात करने की कोशिश करें , लेकिन अगर कोई ऐसी job है जहाँ Hindi से भी काम चल सकता है तो Hindi में ही बात करें . In fact interview के शुरू में ही आप साक्षातकर्ता से पूछ सकते हैं कि Can I answer the questions in Hindi ? क्या मैं अपने उत्तर हिंदी में दे सकता हूँ ? ज्यादातर case में आपको हाँ में ही उत्तर मिलना चाहिए . और फिर आप अपना पूरा Interview Hindi +English मिला कर दे सकते हैं . Actually, बहुत सारी jobs में बस आपको English के समझ की आवश्यकता होती है , भले आप उसे बोल ना पाएं लेकिन , सुनकर या पढ़कर समझने की काबिलियत भी उस काम को करने के लिए पर्याप्त होती है , और Interviewer भी इस बात को समझता है.

ऐसा करने का सबसे बड़ा लाभ ये है कि आप स्वयं को अच्छे से व्यक्त कर पायेंगे और आपकी उस नौकरी से related जो भी knowledge है उसे interviewer के सामने आसानी से ला पाएंगे . और जब आप ऐसा करेंगे तो आपके success के chance निश्चित रूप से बढ़ जायेंगे .

10) ये सोच कर चलें कि Selection हुआ तो अच्छा नहीं तो कुछ इससे भी अच्छा होगा :

Interview में select होने के लिए बहुत over conscious मत होइए . अगर आप select नहीं होते हैं तो भी दुनिया इधर की उधर नहीं होने वाली , in fact कुछ महीनों बाद शायद आपको याद भी ना रहे कि आप ऐसे किसी interview में appear हुए थे . Positive attitude रखने वाले ये मान कर चलते हैं कि जो होता है अच्छा होता है.

मैंने 2010 में Max Newyork Life में trainer के लिए interview दिया था , पर सौभाग्य से मेरा selection उसमे नहीं हुआ . सौभाग्य इसलिए क्योंकि उस समय जितने भी लोगों को as a trainer लिया गया था उन्हें market conditions ख़राब होने की वजह से 6 महीने के अन्दर निकाल दिया गया .वहीँ दूसरी ओर कुछ दिनों बाद ही मेरा selection HCL Technologies में हो गया , जो कि work culture और monetarily दोनों तरह से मेरे लिए अच्छा रहा , और इस job की बदौलत मुझे Finland,Europe जाने का भी मौका मिला .

Friends, I hope कि यहाँ share की गयी बातें आपके काम आएँगी और आप इंटरव्यू में अपनी success rate को पहले से improve कर पायेंगे . मुझे आपके feedback और इंटरव्यू से related questions का इंतज़ार रहेगा .